चाल्या क्यॉं तमे?

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सुकून

रातभर आज चॉंदनी को अपनी आग़ोश में समेटा जाएँआसमॉं की चद्दर बना के सुकून से उस पे लेटा जाएँ
लग रही है रजनी अनुपम, श्रृंगार कर के लावण्यमयी 

सितारों की ही साड़ी बुन के उस के बदन पे लपेटा जाएँ
मिल चूका है मतलबी रिश्तों से नफ़रत का ज़हर बहुत

आत्म मंथन कर के मोहब्बत का अमृत अब उलेटा जाएँ 
इंतज़ार किया है दुश्मन के दाँत खट्टे करने का लंबे अरसों से 

मिला है मौक़ा अब, मजबूत इरादों से उन पे झपेटा जाएँ 
सह लिया है मुल्क ने दहशतगर्दों को अमन की उम्मीद में 

नापाक ईरादे रखने वालों को क़ायम के लिए खदेड़ा जाएँ 
© कमलेश रविशंकर रावल कमल की कलम से

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ગુલકંદ

એના હોઠો ના ગુલાબે હું મકરંદ થઇ ગયો હતો જે કડવો લીમડો એ ગુલકંદ થઇ ગયો
હું કારા ને ફંૂકારા બોલાવતો હતો ભર બપોરે 

એ સંધ્યા ટાણે શીતળ ને મંદ મંદ થઈ ગયો 
ગોઠવાતો નહોતો વર્ણાનુપ્રાસ અલંકાર જ્યાં

એ પંક્તિ માં અચાનક અનુષ્ટુપ છંદ થઈ ગયો 
કમાઈ ના હોય ભલે કોડી ને ખોટી વાહવાહી

મા બાપ ની સેવા કરી ઉત્તમ ફરજંદ થઈ ગયો   

  

સુનું ને ભેંકાર ભાસતું હતું ખોરડું વરસો થી  ે

શિશુ ના આગમને આંગણે પરમાનંદ થઈ ગયો 

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जगदीश 

जगदीश बैठा कोख में और गोपी ग़ैरों को पुकारे

कान्हा समा के सब कुछ निज में, जग को निहारे 
पहचान लेती पल में लगाई होती गोती यदि भीतर 

गंवा दी व्यर्थ जिंदगी सारी, बैठ के यमुना किनारे
याद करा रहा है कान, बिसरा दिया हमने जो ज्ञान

भूला गीता संदेश ताज़ा करना होगा रोज सकारे
 करता जा कर्म निडर हो के, मानव धर्म के पथ पे 

बिगड़ी सारी बाज़ी वो मुरलीधर पल में सम्हाले 

  

ना विचलित हो, ना भ्रमित हो, कर्तव्य पथ से कभी

तेरी जिंदगी की सब उलझी गुत्थी सॉंवरियो सँवारे

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तोहफ़ा 

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है मेरा हिन्दुस्तान

जहॉं की भोर मंदिर की घंटी से सुरीली होती और शाम सिंदूरी होती जब मस्जिद में होती अज़ान
गुरुद्वारे में दिन भर गुरुबाणी का कीर्तन होता हर गिरजाघर में ईश के होते सदैव गुणगान
सारे मज़हब का समंदर है मेरा हिन्दुस्तान

जहाँ गंगा जमुना की तहज़ीब का शिव की सारी नगरी करे बिस्मिल्ला की शहनाई से रस पान
और कृष्ण भक्ति के गीत लिखने में मस्त रहे गंगा की लहरों के बीच मोमीन रसखान
सारे जग को प्यारा सबरस है मेरा हिन्दुस्तान

यहाँ ख्वाजा की मज़ार पे चढ़ाए हिंदु भी अपनी मन्नत की चद्दर
बचाने औरत की लाज ले ले आम आदमी सियासत से टक्कर
मॉंभोम की आज़ादी की ख़ातिर कर दे
मर्दाना झाँसी की रानी ब्रिटिश ताज के सामने इन्किलाबी एलान
शूरवीरों की धन्य धरा है मेरा हिन्दुस्तान

सर्फरोशी की तमन्ना का पहन के बसंती चोला
चल पड़ा था भगत राजगुरु सुखदेव का मतवाली टोला
क़ुर्बान हो गए पंडित बिस्मिल और अश्फ़ाक उल्ला खान
शहीदो की पुण्य भूमि है मेरा हिन्दुस्तान

पैदा होती यहाँ शबरी, मीरा, सावित्री और सीता
कर्मयोग का ज्ञान देने स्वयं कृष्ण कहे जहॉं गीता
यहॉं की नारी भी भरे गौरव से अवकाश में उड़ान
जहाँ में अमनचैन की मिसाल है मेरा हिन्दुस्तान

प्यारा है हर जवान को अपने जान से ये वतन
मरते दम तक उस का दुश्मन से करेगा जतन
कर नहीं ग़ुस्ताख़ी कश्मीर में पड़ोसी तू सम्हाल बलूचिस्तान
लोहे लेगा यदि , हमसे तो तेरे और भी टुकड़े होंगे पाकिस्तान
याद रखना तुम्हें तीन तीन जंग हरा चूका है मेरा हिन्दुस्तान

देशवासियों उठो जागो सच की राह से दूर ना भागो
भ्रष्टाचार के भोरींग को क़ायम के लिए मिल के दाग़ों
तिरंगे की शान की ख़ातिर जवान हो रहे है रोज क़ुर्बान
पूरा करना होगा हम सब को शहीदों के अधूरे अरमान
जात -पात , प्रदेश-भाषा वाद मिटाने का फैलाओ अभियान
काम करते रहो कुछ ऐसा जिससे बने हमारा भारत महान

स्वतंत्रता पर्व पे सब को अर्पित ये गीत “है मेरा हिन्दुस्तान”

© कमलेश रविशंकर रावल

#जयहिंद #independenceday

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गुरुर

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मोती

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