चाल्या क्यॉं तमे?

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दम

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तलाश

ना जाने आज फिर क्यूँ ज्वारें तलाश रही है ज़िंदगी,
महफूज है जमीं पे फिर क्यूँ मीनारे तलाश रही है ज़िंदगी

मिल जाता है दानापानी सब को उन की किस्मत का
फिर किस लिए दूसरों के खेत में निवारे तलाश रही है ज़िंदगी

खुश है खानाबदोश खुले आसमान में रातें गुजार के
सुकूँ के लिए महलों में और दीवारे तलाश रही है ज़िंदगी

रोशन हो रहा है जहाँ सारा चाँद की चाँदनी में नहा के
फिर कौन सी चमक के लिए सितारे तलाश रही है ज़िंदगी

लूट रहे हैं खूब मजा समंदर में खुशगवार लहरों का
बस अब तो ठहराव के लिए किनारे तलाश रही है ज़िंदगी

© कमलेश रविशंकर रावल

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દિવાળી

મન માં થી વહેમ ના જાળાં કાઢો તો થાય દિવાળી
દુશ્મન ને નહીં દુશ્મનાવટ ને વાઢો તો થાય દિવાળી

ભૂત-પલિત ને મેલો પડતાં, સંબંધો માં એ છે નડતાં
કાળી ચૌદશે કાલ ના લક્ષ્ય ને સાધો તો થાય દિવાળી

જાતે માણસ છીએ બધાં,ભલે રહ્યાં ખોળિયાં જુદાં,
માણસાઈ ના સંબંધે શરતો, ના લાદો તો થાય દિવાળી

દુઃખ-દર્દ ગત વર્ષ ના ભૂલાવી, રિસાયેલા ને મનાવી
હસી-ખુશી થી મમળાવો મીઠી યાદો તો થાય દિવાળી

અજ્ઞાન નો અંધકાર ભગાવી, કંકાસ ને કાયમ વળાવી
આતમ-દિલે હરખ ના દિવડા પ્રગટાવો તો થાય દિવાળી

© कमलेश रविशंकर रावल

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इमानदार

आप पानी पे ही पानी की कहानी लिखते रहे
हम जल महल में इंतज़ार करते जलते रहे

प्यार नहीं है कोई खेल, है ये रूह और दिलों का मेल
पर तुम मोहब्बत के नाम पे जिस्म से सिर्फ छलते रहे

लग गई थी भनक पहली नजर में तेरी आँखों को पढ के
फिर भी एतबार कर हम तेरे दिल की राह चलते रहे

पा लेते इल्काब हम भी औंरों की तरह खुशामदी से
बस थे इमानदार इस लिए जहाँ को कायम खलते रहे

बिखर जाते वक्त की आँधी तूफानों में औरों की तरह
ज़िंदा रहने के लिए हवा के रुख की ओर हम ढलते रहे

© कमलेश रविशंकर रावल

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रहनुमा

गले मिल के पीछे से वार करना, सिखा रहे हैं लोग,
भटका के मंजील़ रहनुमा बनने राह, दिखा रहे हैं लोग

बनाते हैं, बताते हैं अनजानों को भी
दोस्त, रुतबा जताने
पर कलह का ज़हर कबीले के रिश्तों में मिला रहे हैं लोग

तोड़ दी उम्मीद और कर दिया है हौंसला तहसनहस
तसल्ली के ख़ातिर, साथ देने का एतबार दिला रहे हैं लोग

मौज लूटते थे महफ़िलों में मेरी वाहवाही करते करते
तन्हाईयों में मुझे रुसवाईयों का जाम पिला रहे हैं लोग

खुश हो रहे हैं बहुत, मेरे बूरे हाल की खबर सूनते ही
नहीं आता समझ “कमल” को कैसी यारी निभा रहे हैं लोग

© कमलेश रविशंकर रावल

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बात कर

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सूर

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