चाल्या क्यॉं तमे?

image.jpeg

Advertisements
Image | Posted on by | Leave a comment

हिसाब

कांटों को कुचल कर बना तू अपनी राह,
वफा कर पथ्थर दिल में जगा तू अपनी चाह

यूँ रंजिश रख के जल ना, तू बदले की आग में,
सीने में नफ़रत रख लगा ना, रुह को तू अपनी दाह

दो दिन की जिंदगी में किस-किस से बैर रखेगा?
मिल ले गले दुश्मन को फैला के तू अपनी बाँह

मरने के बाद तेरे साथ कुछ भी ना जाएगा यहाँ से,
जरूरतमंद को बाँँट, जीते जी सून ले तू अपनी वाह

किस किस के गुनाह का रखेगा हिसाब तू “कमल”
गुजार नेकी करते हुए बस ईमान से तू अपनी माह

© कमलेश रविशंकर रावल

Posted in संवेदना, हिन्दी | Leave a comment

रसद

मेरे यार ख्वाबों और तस्वीरों की कोई उम्र कहाँ होती हैं,
तारीख की तवारीख़ में वो तो हररोज जवाँ होती है

मिटती नहीं मोहब्बत की खुशबू मन से कभी वक्त के साथ
अक्सर यादों के गुलदस्ते में महकते हुए हरदिन जमा होती है

लाख वफा करके भी नहीं पहुंच पाते साहिल पे हम,
चलती है कश्ती उसी ओर किस्मत की हवा जहाँ होती है

फिक्र ना कर इंसानियत की राह में आँधी तूफानों का तू,
बुझता नहीं चिराग जिस को परवरदिगार की अमाँ होती है

ऐसा भी नहीं कि मिलता नहीं साथ क़ुदरत का किसी को
पहुंच ही जाती है रब की रसद जिस बंदे की बुलंद इमाँ होती है

© कमलेश रविशंकर रावल

Posted in Uncategorized | Leave a comment

प्यास

Posted in दोस्ती और जिंदगी ..., हिन्दी | Leave a comment

एतबार

Posted in "प्रेम का प्याला", हिन्दी | Leave a comment

आबरु

तुम कोई मोहब्बत के फरिश्ते नहीं,
इंसान हो, नबी जितने खुदा से रिश्ते नहीं

करना है प्यार तो ताउम्र रूह और दिल से करो,
मूझे तो पूरी रकम ही पसंद हैं, किश्तें नहीं

वादा वही करता हुँ जिसे अंजाम तक पहुँचा सकुँ,
हकीकत में काम ही पसंद हैं, सुनने वाले किस्से नहीं

माना कि इश्क़ मिजाजी तबियत है पर दूसरों का भी ख्याल करो
दिल किसी एक को ही दिया कर,अलग-अलग हिस्से नहीं

गौर पराया करो किसी की इज्ज़त से खेलने से पहले
आबरु आबरु ही होती है उस की कोई अलग किस्में नहीं

Posted in Uncategorized | 1 Comment

अल्लड

कुछ तो खास है तेरी अदाओं और अल्फ़ाज में                हो गई है मोहब्बत हमें तेरे ये अल्लड अंदाज़ से

ख़ामोश निगाहें ही तेरी दीवाना बना गई है मुझे
ना जाने हाल क्या होगा मेरे दिल का तेरी आवाज़ से

सिर्फ तूम्हारी संगत ही है मेरे दर्द की आखरी दवा
तबियत मेरी सही ना होगी जहाँ के और कोई इलाज से

प्यार हो गया है तुम से वो इकरार करता हूँ खुलेआम,
मुझे ना कुछ लेना-देना है दुनिया के किसी रिवाज़ से

हौंसला और हिंमत ना हार, दो-चार नाकामयाबी देख के
हाँसिल होती है काबिलियत जिंदगी में लगातार रियाज से

© कमलेश रविशंकर रावल

Posted in "प्रेम का प्याला", हिन्दी | Leave a comment

तेरे जाने के बाद

दिल को पल भी कहाँ करार आया तेरे जाने के बाद                                                        सिर्फ तेरा और तेरा ही खयाल आया तेरे जाने के बाद,

अमन-चैन और खुशीयाँ अपने साथ में ही ले गई हो
हिस्से में मेरे तो सिर्फ मलाल आया तेरे जाने के बाद

तू जहाँ पैर रखती थी वहाँ महफिल अपने आप सजती थी
तुझे क्यूँ ना रोक पाया वही सवाल आया तेरे जाने के बाद

दौड आते थे फरिश्ते मदद करने, इबादत में याद करते ही
मुश्किल घड़ी में जन्नत से ना जवाब आया तेरे जाने के बाद

समझ ही नहीं सकता कोई हमारे दर्द ए जिगर का हाल ही अब तो,
तुझे हर बार याद करते ही दिल में भूचाल आया तेरे जाने के बाद

© कमलेश रविशंकर रावल

Posted in "प्रेम का प्याला", हिन्दी | Leave a comment