चाल्या क्यॉं तमे?

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ख़बर

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दिसम्बर

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खामोश

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શ્વાસ

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શ્વાસ

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उम्र

उम्र तो हर रोज यूँ ही सफर करती रहेगी,
पर तेरी यादें अक्सर असर करती रहेगी

किस्मत खेलती है हर दिन नया खेल अपना,
उम्मीद के सहारे जिंदगी बसर करती रहेगी

बंद करोगे संदेशा देना रूठ के या मजबूरी से
फिजा़ की महकती हवाएँ तेरी खबर करती रहेगी

हौंसला हार के छोडुँगा नहीं मैं राह मोहब्बत की,
ख्वाहिशें मंजि़ल का मजबूती से सबर करती रहेगी

माना कि मुश्किलें आएगी इंसानियत की सफर में लाखों,
मेरी नियत और तेरी दुआएँ शैतानियत को बे-असर करती रहेगी

© कमलेश रविशंकर रावल

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