Monthly Archives: December 2018

શિરસ્તો

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शायद

साथ रह के जुड ना पाए दो दिल, जोड देगी अब तन्हाईयाँ शायद! कोशिश बहुत की थी मनाने की, मना लेगी अब रुसवाईयाँ शायद! खुश ना रख पाई मेरी मुस्कराहट कभी उन के मुरझाए मन को, राजी करे देगी अब … Continue reading

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लब

मासूमों की मुस्कान में हमें तो रब नज़र आता है दिल की गहराईयों में झांखोगे तो सब नज़र आता है महसूस करता हूँ मौला की संगत मैं तो हरदम – हरपल, शिकायत करेंगे काफ़िर, उन्हें खुदा कब नज़र आता है … Continue reading

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