Category Archives: संवेदना

संवेदना इंसान में होती है जिन के दिल में मानवता के भावनाएं होती हैं…पत्थर दिल इन्सान जानवर जल्दी बन जाता हैं…हम पृथ्वी पर मानवीय भावनाओं को जागृत कर के पृथ्वी को स्वर्ग बना सकते हैं…!!

आबरु

तुम कोई मोहब्बत के फरिश्ते नहीं, इंसान हो, नबी जितने खुदा से रिश्ते नहीं करना है प्यार तो ताउम्र रूह और दिल से करो, मूझे तो पूरी रकम ही पसंद हैं, किश्तें नहीं वादा वही करता हुँ जिसे अंजाम तक पहुँचा … Continue reading

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कहीं और कर

छोड़ तेरी छंद की सूफियाना बातों को जज़्बात पे गौर कर, मिल ले गले, अना छोड के वरना मुलाकात कहीं और कर पाक है दामन मेरा, नहीं फंसा पाओगे इल्जाम लगा के, करनी है गुनाह की छानबीन, तो तहकीकात कहीं … Continue reading

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शायद

साथ रह के जुड ना पाए दो दिल, जोड देगी अब तन्हाईयाँ शायद! कोशिश बहुत की थी मनाने की, मना लेगी अब रुसवाईयाँ शायद! खुश ना रख पाई मेरी मुस्कराहट कभी उन के मुरझाए मन को, राजी करे देगी अब … Continue reading

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लब

मासूमों की मुस्कान में हमें तो रब नज़र आता है दिल की गहराईयों में झांखोगे तो सब नज़र आता है महसूस करता हूँ मौला की संगत मैं तो हरदम – हरपल, शिकायत करेंगे काफ़िर, उन्हें खुदा कब नज़र आता है … Continue reading

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वजह

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तलाश

ना जाने आज फिर क्यूँ ज्वारें तलाश रही है ज़िंदगी, महफूज है जमीं पे फिर क्यूँ मीनारे तलाश रही है ज़िंदगी मिल जाता है दानापानी सब को उन की किस्मत का फिर किस लिए दूसरों के खेत में निवारे तलाश … Continue reading

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बात कर

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