Category Archives: संवेदना

संवेदना इंसान में होती है जिन के दिल में मानवता के भावनाएं होती हैं…पत्थर दिल इन्सान जानवर जल्दी बन जाता हैं…हम पृथ्वी पर मानवीय भावनाओं को जागृत कर के पृथ्वी को स्वर्ग बना सकते हैं…!!

रूबरू

रूबरू ना मिलना हो तो ख्वाबों में ना आया करो, रूलाना ही है हकीकत में, तो सपनों में ना हँसाया करो रख नहीं सकते हिंमत जमाने में ईश्क के ऐलान की, तो छुपछुप के हमें दिल में तुम यूँ ना … Continue reading

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चित्कार

भीतर चीखते मेरे अल्फाज़ सुन सको तो सूनो तुम! रुह की खामोशीयों की चित्कार सुन सको तो सूनो तुम! सिर्फ शोरबकोर नहीं ये नया इंकिलाबी ऐलान है, अवाम की जोश लल्कार सुन सको तो सूनो तुम! घुँघरुँ नहीं बाँधे है … Continue reading

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શ્વાસ

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हिसाब

कांटों को कुचल कर बना तू अपनी राह, वफा कर पथ्थर दिल में जगा तू अपनी चाह यूँ रंजिश रख के जल ना, तू बदले की आग में, सीने में नफ़रत रख लगा ना, रुह को तू अपनी दाह दो … Continue reading

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आबरु

तुम कोई मोहब्बत के फरिश्ते नहीं, इंसान हो, नबी जितने खुदा से रिश्ते नहीं करना है प्यार तो ताउम्र रूह और दिल से करो, मूझे तो पूरी रकम ही पसंद हैं, किश्तें नहीं वादा वही करता हुँ जिसे अंजाम तक पहुँचा … Continue reading

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कहीं और कर

छोड़ तेरी छंद की सूफियाना बातों को जज़्बात पे गौर कर, मिल ले गले, अना छोड के वरना मुलाकात कहीं और कर पाक है दामन मेरा, नहीं फंसा पाओगे इल्जाम लगा के, करनी है गुनाह की छानबीन, तो तहकीकात कहीं … Continue reading

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शायद

साथ रह के जुड ना पाए दो दिल, जोड देगी अब तन्हाईयाँ शायद! कोशिश बहुत की थी मनाने की, मना लेगी अब रुसवाईयाँ शायद! खुश ना रख पाई मेरी मुस्कराहट कभी उन के मुरझाए मन को, राजी करे देगी अब … Continue reading

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