Category Archives: संवेदना

संवेदना इंसान में होती है जिन के दिल में मानवता के भावनाएं होती हैं…पत्थर दिल इन्सान जानवर जल्दी बन जाता हैं…हम पृथ्वी पर मानवीय भावनाओं को जागृत कर के पृथ्वी को स्वर्ग बना सकते हैं…!!

तलाश

ना जाने आज फिर क्यूँ ज्वारें तलाश रही है ज़िंदगी, महफूज है जमीं पे फिर क्यूँ मीनारे तलाश रही है ज़िंदगी मिल जाता है दानापानी सब को उन की किस्मत का फिर किस लिए दूसरों के खेत में निवारे तलाश … Continue reading

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बात कर

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तारीफ़

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अजर- अमर

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निशान

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काफ़िर

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बे-दर्द

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