Category Archives: प्रक्रुति और ईश्वर

मेरी यह कवितायेँ परम कृपालु परमात्मा के सादर चरण में समर्पित है ,,,मेरे विचार से इश्वर विश्व के समग्र अंश में समाहित है ,,सारे धर्मों का सार और उद्देश्य मानवता, शान्ति और विश्व बंधुत्व है.. सुबह सुबह और किसी भी पल में जब भी परमात्मा मुझ में कोइ विचार स्फुरित कर के संवेदना जगाता है तब मैं मेरे उस अनुभवों को यहाँ “बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय” प्रकट कर के नर नारायण से जुड़ने की कोशिश करता रहता हूँ….आप भी मुजे अपना आत्मन समज के आप के भावनाओं के स्पर्श से आत्मीयता प्रदान करें!

जगदीश 

जगदीश बैठा कोख में और गोपी ग़ैरों को पुकारे कान्हा समा के सब कुछ निज में, जग को निहारे  पहचान लेती पल में लगाई होती गोती यदि भीतर  गंवा दी व्यर्थ जिंदगी सारी, बैठ के यमुना किनारे याद करा रहा … Continue reading

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पनाह

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बारिश

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मूरत

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श्री राम नवमी

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नया साल

दूर क्षितिज में सूरज चमका लाल है खुशियाँ मनाओ शुरु हुआ नया साल है कर लेंगे लक्ष्य हाँसिल,मुश्किल राह में पथदर्शक सारे संसार का महाकाल है फिक्र आनेवाली कल की क्यों करते हो, महेनत और लगन की अपने पास ढाल … Continue reading

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चाँद

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