Category Archives: प्रक्रुति और ईश्वर

मेरी यह कवितायेँ परम कृपालु परमात्मा के सादर चरण में समर्पित है ,,,मेरे विचार से इश्वर विश्व के समग्र अंश में समाहित है ,,सारे धर्मों का सार और उद्देश्य मानवता, शान्ति और विश्व बंधुत्व है.. सुबह सुबह और किसी भी पल में जब भी परमात्मा मुझ में कोइ विचार स्फुरित कर के संवेदना जगाता है तब मैं मेरे उस अनुभवों को यहाँ “बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय” प्रकट कर के नर नारायण से जुड़ने की कोशिश करता रहता हूँ….आप भी मुजे अपना आत्मन समज के आप के भावनाओं के स्पर्श से आत्मीयता प्रदान करें!

दिसम्बर

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मज़हब

राम -रहीम का नाम लेते ही हर चहेरे पे नूर हो जाए मज़हब की दूरियाँ कायम के लिए यूँ ही दूर हो जाए गिर जाए फिरका परस्ती की दिवारें और फैले भाईचारा तो दुनिया में मेरा हिंदोस्तान सब से मकदूर … Continue reading

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नियाज

मिलती नहीं तेरी नियत तेरे कारनामों से, आगाज़ बदल अल्फाजों और किरदार का मेल ही नहीं हैं आवाज़ बदल नहीं पहुँच रहे है सूर, बार बार दोहरा के भी रूह तक कुछ तो कमी होगी तेरी तालीम में थोडा रियाज … Continue reading

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तलाश

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श्री राम

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રામ

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खुशी

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