Monthly Archives: June 2014

મોગરા

મોગરા તમે વાવી આંગણે ખુશ્બૂ પ્રસરાવી …મઘમઘતા કરી દીધા અમને તમે બોલાવી  હતા અમે તો શાયર, સાકી તમે બનાવ્યા શરાબી નજરો થી જોબન ના જામ પીવડાવી  લગાવી છે ડૂબકી હૈયે તમારા મરજીવા બની જશો નાં દિલ થી દૂર હવે નયનો થી નૈન … Continue reading

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बटर

दूर रह के भी तू आज भी दिल के पास है जानेजाना मोहब्बत ही हमारी कुछ खास है मुस्कुरा लेती हो सून की आज भी नाम मेरा फिर भी ना जाने क्यों मन में कौन सी फांस है तुम ही हो मेरे … Continue reading

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हनन

कर के ले गया था रावण सीता का अपहरण द्रौपदी का भी हुआ था एक ही बार वस्त्राहरण पर इस भरे कलजुग में हो रहा है “कमल”नारी पे अत्याचार सुसज्जित समयबद्ध चरण हर घर बन गया रावण का महल और … Continue reading

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लड़कियाँ

खेलती थी आँगन सब के आशा – उम्मीद – अरमान से हरी भरी ये लड़कियाँ…क्यों रहती है सहमी सहमी आजकल, उड़ती थी हवाओं में परी की तरह लड़कियाँ  जल रही है भय के अंगारो से बाजार -गली -मोहल्ले में ठरी … Continue reading

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दुर्गा

शर्म को न बनाओ अपना शृंगार तुम ओ नारी …नहीं तो होते रहेंगे अत्याचार रोज तुम पे भारी … मत सोचो मिलेगी मदद बदलने तुम्हारी दशा सियासत चलाने के लिए हो रहे हैं बयान जारी …. उठा लो दुर्गा बन के … Continue reading

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मंझूर

जिद हैं उन की कि “कमल” से जुदा हो के ही रहेंगे …खाई है कसम भी कलम ने कागज़ पे दिल की हर बात लिखेंगे  सह लेंगे दर्द सारा चुपचाप आँखों से कभी ना हमारे अश्क कुछ कहेंगेतुझे है जो … Continue reading

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सपन

खोई एक कन्या गहन मंथन में ….पीया के सुन्दर सरग सपन में….. छलके जाम उसके मस्त नयन मेंचमके सितारे श्वेत धवल कवन में  उतर गई भीतर परम के मनन में “कमल” के शीतल चंदन कथन में 

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